Skip to main content

Posts

Showing posts from 2020

कोहरे में लिपटी हुई भोर

 बारिशों का जाना इस बार तय नहीं था, बड़ी फुरसत में थी बारिशें  और मैं.. न बारिश को अलविदा कहना चाहती थी, न ठंड से दूर रह सकती थी, आज सुबह अचानक.. बालकनी में जैसे कोई कोहरे की चादर बिछ गई थी, और मैं उस कोहरे में खो जाना चाहती थी, आसमान मस्त बादलों के धुन्ध के पीछे, दीवाना से झूम रहा है, पुरवाई ठंडी अंगड़ाई ले रहीं है, दूर पहाड़ों पर रोशनी का आँचल ढलका है, सूरज फिर मचला निखरने को,  मिट्टी की नमी पेड़ पौधों को भा गई, मेरी आँखों में कोहरे से लिपटी हुई, एक सुबह उतर आई,, स्वागत है शीत ऋतु तुम्हारा,, स्वागत है,,, डॉ सुषमा गजापुरे #drsushmaagajapure